सीधा जवाब: विवाह का रजिस्ट्रेशन कराने पर विवाह प्रमाण पत्र मिलता है, और यह रजिस्ट्रेशन हिंदू विवाह अधिनियम 1955 या विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत होता है; प्रक्रिया, शुल्क और दस्तावेज़ राज्य तय करते हैं। उदाहरण के लिए छत्तीसगढ़ के सेवा सेतु पोर्टल पर शुल्क ₹30, समय-सीमा 15 दिन, 8 दस्तावेज़ अनिवार्य हैं, और जारी प्रमाण पत्र पोर्टल के अनुसार जीवनभर के लिए मान्य है। यह जानकारी अक्टूबर 2026 में जाँची गई है। जो इन सरकारी पेजों पर नहीं मिला, जैसे डुप्लीकेट का शुल्क, उसे हम नहीं बताएँगे।

छत्तीसगढ़ के सेवा सेतु पोर्टल पर विवाह प्रमाण पत्र
  • ₹30शुल्क, सेवा सेतु केंद्र पर भी और ऑनलाइन भी
  • 15 दिनपोर्टल पर बताई समय-सीमासामान्यतः 15 कार्य दिवस के भीतर
  • आजीवनप्रमाण पत्र की वैधताडिजिटल हस्ताक्षर वाला, पोर्टल से डाउनलोड

स्रोत: सेवा सेतु पोर्टल, छत्तीसगढ़ सरकार (विवाह प्रमाणपत्र) · अक्टूबर 2026 में जाँचा गया। दूसरे राज्यों में शुल्क और समय अलग हैं।

कौन-सा कानून लागू होता है

ग़ाज़ियाबाद के ज़िला पोर्टल के अनुसार हो चुके विवाह का रजिस्ट्रेशन दो में से एक कानून के तहत हो सकता है: जब पति-पत्नी दोनों हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हों (या इन धर्मों में से किसी में आए हों), तब हिंदू विवाह अधिनियम 1955; और जब दोनों में से कोई एक या दोनों इनमें से नहीं हैं, तब विशेष विवाह अधिनियम 1954।

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में इसका ढाँचा दिया है। विशेष विवाह अधिनियम में हर विवाह विशेष रूप से नियुक्त विवाह अधिकारी के पास रजिस्टर होता है। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 8 में कुछ व्यवस्था है, जिसमें राज्य सरकार रजिस्ट्रेशन के नियम बना सकती है और अनिवार्य करने पर नियम तोड़ने वाले को जुर्माना हो सकता है। फ़ैसले के अनुसार इस अधिनियम में यह भी साफ़ है कि रजिस्टर में प्रविष्टि न होने से विवाह की वैधता पर असर नहीं पड़ता। गोवा में अलग कानून चलता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

आवेदन से डाउनलोड तक (छत्तीसगढ़ का उदाहरण)
  1. पोर्टल पर पंजीकरणसेवा सेतु पोर्टल पर खुद रजिस्टर करें, या सेवा सेतु केंद्र (CSC) के लॉगिन से आवेदन करें
  2. सेवा चुनकर फ़ॉर्म भरेंविवाह प्रमाणपत्र सेवा चुनें और दस्तावेज़ जोड़ें
  3. ₹30 शुल्कसेवा सेतु केंद्र या ऑनलाइन, दोनों में एक-सा
  4. पावती संख्या (ARN) से ट्रैक करेंआवेदन के बाद मिली अद्वितीय पावती संख्या से स्थिति देखें
  5. SMS आने पर डाउनलोडमंज़ूरी के बाद डिजिटल हस्ताक्षर वाला प्रमाण पत्र पोर्टल से डाउनलोड करें

स्रोत: सेवा सेतु पोर्टल, छत्तीसगढ़ सरकार · अक्टूबर 2026

14 फ़रवरी 2006 के फ़ैसले (Seema बनाम Ashwani Kumar) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत के नागरिकों के सभी धर्मों के विवाह उस राज्य में अनिवार्य रूप से रजिस्टर करने योग्य बनाए जाएँ जहाँ विवाह हुआ। राज्यों को तीन महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अधिसूचित करनी थी, उसके पहले जनता की आपत्तियाँ माँगकर। नियमों में उम्र और वैवाहिक स्थिति साफ़ दर्ज हो, और रजिस्ट्रेशन न कराने या झूठी घोषणा करने के नतीजे भी तय हों।

कोर्ट ने यह भी कहा कि रजिस्ट्रेशन अपने आप में वैध विवाह का प्रमाण नहीं है और वैधता का निर्णायक कारक भी नहीं है, पर बच्चों की कस्टडी, उनके अधिकार और विवाह के समय पक्षों की उम्र के मामलों में इसका बड़ा साक्ष्य-मूल्य है। इसीलिए जिस पक्ष का विवाह रजिस्टर नहीं है, उसे रजिस्ट्रेशन से मिलने वाली वह सहूलियत नहीं मिलती।

छत्तीसगढ़ का उदाहरण: दस्तावेज़ और शुल्क

छत्तीसगढ़ पोर्टल पर अनिवार्य दस्तावेज़

स्रोत: सेवा सेतु पोर्टल, छत्तीसगढ़ सरकार; पोर्टल पर 14 दस्तावेज़ सूचीबद्ध हैं, 8 अनिवार्य · अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ के सेवा सेतु पोर्टल पर 14 दस्तावेज़ सूचीबद्ध हैं। 8 अनिवार्य हैं: शपथ पत्र, वर और वधु का संयुक्त फ़ोटो (2A साइज़), दोनों के जन्म प्रमाण पत्र, दोनों द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेज़ के प्रथम और द्वितीय पेज, चालान की प्रति, और विवाह आमंत्रण पत्र। बाकी जहाँ लागू हों: तलाक, विधवा, अंतरधार्मिक विवाह का प्रमाण पत्र, और विवाह कराने वाले या समुदाय का प्रमाण पत्र।

शुल्क सेवा सेतु केंद्र पर भी ₹30 है और ऑनलाइन भी ₹30। आवेदन के बाद पावती संख्या (ARN) मिलती है, मंज़ूरी पर SMS आता है, और डिजिटल हस्ताक्षर वाला प्रमाण पत्र पोर्टल से डाउनलोड होता है। पेज के अनुसार विवाह नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, मंडल या वार्ड के क्षेत्राधिकार में होना चाहिए।

ध्यान रखिए: पेज पर विवाह के बाद कितने दिन में रजिस्ट्रेशन कराना है, और देर होने पर क्या शुल्क लगेगा, यह नहीं लिखा है। यह राज्य के नियमों में होता है।

खो जाने पर

हमें कोई ऐसा सरकारी पेज नहीं मिला जिसमें विवाह प्रमाण पत्र की डुप्लीकेट कॉपी का शुल्क और प्रक्रिया लिखी हो, इसलिए यहाँ आँकड़ा नहीं दे रहे। इतना तय है: रजिस्ट्रेशन उसी राज्य की व्यवस्था में दर्ज है जहाँ विवाह हुआ, तो कॉपी वहीं के पोर्टल, रजिस्ट्रार या सेवा केंद्र से माँगी जाएगी। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्रमाण पत्र पोर्टल से डाउनलोड होता है, इसलिए खाते में लॉगिन करके या पावती संख्या से देखिए। जन्म प्रमाण पत्र के खोने का हाल जन्म प्रमाण पत्र खो गया में है; नियम अलग हैं, पर तरीका मिलता-जुलता है कि वहीं से कॉपी निकलती है जहाँ रिकॉर्ड दर्ज है।

शादी के बाद नाम और पते का बदलाव

विवाह प्रमाण पत्र अक्सर शादी के बाद नाम या पता बदलवाने में लगता है। आधार में पता बदलने का तरीका आधार में पता बदलना में है और पासपोर्ट का पासपोर्ट रिन्यूअल में। हर जगह कौन-से दस्तावेज़ मान्य हैं, यह वही विभाग तय करता है; माँगने वाले से पूछ लीजिए।

सहेजने का तरीका

हाथ से: प्रमाण पत्र की PDF एक ही फ़ोल्डर में रखिए और पावती संख्या अलग से लिख लीजिए, क्योंकि दोबारा कॉपी निकालने में वही काम आती है। शादी का शपथ पत्र और जन्म प्रमाण पत्र की प्रतियाँ भी वहीं रखिए। बच्चे के कागज़ों की सूची नवजात के कागज़ में है।

Paperlock में विवाह प्रमाण पत्र की फ़ोटो या PDF डालेंगे तो ऐप नाम, तारीख़ और प्रमाण पत्र का प्रकार पढ़कर उसे फ़ाइल कर देता है। बाद में पूछिए “हमारा विवाह प्रमाण पत्र कहाँ है?” और दस्तावेज़ साथ में सामने आ जाएगा। यह प्रमाण पत्र आजीवन मान्य बताया गया है, इसलिए इसमें किसी समाप्ति की तारीख़ का रिमाइंडर नहीं बनता।

यह पेज अक्टूबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले, छत्तीसगढ़ के सेवा सेतु पोर्टल और ग़ाज़ियाबाद ज़िला पोर्टल की जानकारी पर आधारित है। अपने राज्य के नियम विवाह रजिस्ट्रार से पक्के कर लीजिए।