सीधा जवाब: जन्म प्रमाण पत्र खो जाए, तो उसी जगह के जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार से नई कॉपी निकलती है जहाँ जन्म हुआ था, यानी वहाँ के नगर निगम, नगर पालिका या पंचायत के रजिस्ट्रार से। जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 की धारा 17 के तहत कोई भी व्यक्ति तय शुल्क देकर जितनी चाहे उतनी कॉपी ले सकता है। शुल्क राज्य तय करते हैं; उदाहरण के लिए गोवा में हर कॉपी ₹50 की है।
यह तभी इतना आसान है जब जन्म का पंजीकरण हुआ हो। अगर कभी हुआ ही नहीं, तो वह देर से पंजीकरण का मामला है, और उसके नियम 1 अक्टूबर 2026 से सख़्त हो गए हैं। दोनों बातें नीचे।
- जगह पता करेंजिस नगर निगम, नगर पालिका या पंचायत क्षेत्र में जन्म हुआ, वहीं के रजिस्ट्रार के पास रिकॉर्ड है
- विवरण जुटाएँनाम, जन्मतिथि, जगह, माता-पिता के नाम; पंजीकरण संख्या मिल जाए तो सबसे अच्छा
- आवेदन करेंCRS पोर्टल वाले राज्यों में ऑनलाइन शुल्क; बाकी में राज्य का पोर्टल या रजिस्ट्रार का दफ़्तर
- कॉपी लेंधारा 17 के तहत तय शुल्क देकर, जितनी चाहें उतनी कॉपी
स्रोत: भारत के महारजिस्ट्रार (ORGI), CRS FAQ और CRS पोर्टल, अक्टूबर 2026।
कॉपी कहाँ से मिलेगी
भारत के महारजिस्ट्रार (ORGI) के अनुसार जन्म का पंजीकरण जन्म की जगह पर होता है, न कि वहाँ जहाँ आप आज रहते हैं। शहरों में आम तौर पर नगर निगम या नगर पालिका का स्वास्थ्य अधिकारी रजिस्ट्रार होता है; गाँवों में यह ज़िम्मेदारी पंचायत, स्वास्थ्य या राजस्व विभाग के अधिकारियों के पास होती है। बड़े सरकारी अस्पतालों में अपनी पंजीकरण इकाइयाँ भी हैं।
ORGI के FAQ के अनुसार सूचना देने वाले को एक कॉपी मुफ़्त मिलती है (धारा 12), और उसके बाद धारा 17 के तहत कोई भी व्यक्ति तय शुल्क देकर कितनी भी कॉपी ले सकता है। यानी खोया प्रमाण पत्र दोबारा “बनवाना” नहीं है, बस रजिस्टर से उसकी कॉपी निकलवानी है।
आवेदन से पहले ये विवरण जुटा लीजिए: पूरा नाम, जन्मतिथि, जन्म की जगह (अस्पताल का नाम भी), माता-पिता के नाम, और अगर कहीं लिखी मिले तो पंजीकरण संख्या। पुरानी फ़ोटोकॉपी, स्कूल के रिकॉर्ड या अस्पताल की डिस्चार्ज स्लिप में ये अक्सर मिल जाते हैं।
ऑनलाइन: CRS पोर्टल या राज्य का पोर्टल
- 21 दिन के भीतरसामान्य पंजीकरण, कोई शुल्क नहीं
- 21 से 30 दिनलेट फ़ीस के साथ (गोवा में ₹20)
- 30 दिन से 1 साललिखित अनुमति, लेट फ़ीस, स्व-सत्यापित दस्तावेज़ (गोवा का उदाहरण)
- 1 से 2 सालDM, SDM या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश
- 2 साल के बादप्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश
स्रोत: ORGI CRS FAQ; जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम 2026, धारा 13(3) और 13(3A), 1 अक्टूबर 2026 से लागू (S.O. 5081(E)); शुल्क गोवा के नियम 2024 का उदाहरण।
ORGI का Civil Registration System (CRS) पोर्टल, dc.crsorgi.gov.in, कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए खुला है, जैसे चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और असम। इस पोर्टल पर डुप्लीकेट प्रमाण पत्र, देर से पंजीकरण और नाम जोड़ने जैसी सेवाओं का शुल्क ऑनलाइन चुकाया जा सकता है। पोर्टल पर “Validate Certificate” का विकल्प भी है, जिससे किसी प्रमाण पत्र का रिकॉर्ड जाँचा जा सकता है।
जिन राज्यों का नाम CRS की सूची में नहीं है, उनकी अपनी व्यवस्था है; अपने नगर निकाय या राज्य के जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग की वेबसाइट देखिए।
जन्म दर्ज ही नहीं हुआ था तो
- रजिस्टर में एक प्रविष्टि की खोज, पहला साल
- ₹20
- हर अतिरिक्त साल की खोज
- ₹20
- जन्म प्रमाण पत्र की हर कॉपी
- ₹50
- जन्म दर्ज न होने का प्रमाणपत्र (non-availability)
- ₹25
स्रोत: गोवा जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) नियम 2024, नियम 13। शुल्क राज्य के नियमों से तय होता है; अपने राज्य में अलग हो सकता है।
जन्म की सूचना 21 दिन के भीतर देनी होती है, और तब पंजीकरण मुफ़्त है। घर पर जन्म हो, तो यह ज़िम्मेदारी घर के मुखिया या नज़दीकी रिश्तेदार की है; अस्पताल में जन्म हो, तो अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की। 21 दिन के बाद भी पंजीकरण हो सकता है, धारा 13 के देर से पंजीकरण वाले नियमों के तहत, शुल्क के साथ।
1 अक्टूबर 2026 से एक साल से ज़्यादा देरी के नियम बदल गए हैं। जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम 2026 के अनुसार एक से दो साल की देरी पर पंजीकरण सिर्फ़ ज़िला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या ज़िला मजिस्ट्रेट से अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश से होगा, और दो साल से ज़्यादा देरी पर सिर्फ़ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से, दोनों में जन्म की सच्चाई की जाँच के बाद। केंद्र सरकार ने 16 सितंबर 2026 की अधिसूचना से इसे 1 अक्टूबर 2026 से लागू किया है।
एक साल से कम की देरी के नियम राज्य के नियमों में हैं। गोवा का उदाहरण: 21 से 30 दिन की देरी पर ₹20 लेट फ़ीस; 30 दिन से एक साल तक ज़िला रजिस्ट्रार या तय अधिकारी की लिखित अनुमति, ₹50 लेट फ़ीस और फ़ॉर्म 14 में स्व-सत्यापित दस्तावेज़।
शुल्क और दूसरे नियम
कॉपी और रजिस्टर में खोज का शुल्क भी राज्य के नियमों में तय है। गोवा में रजिस्टर में एक प्रविष्टि की खोज पहले साल के लिए ₹20 और हर अतिरिक्त साल के लिए ₹20 है, और हर प्रमाण पत्र ₹50 का। अगर रजिस्टर में जन्म दर्ज ही न मिले, तो उसका “non-availability” प्रमाणपत्र ₹25 में मिलता है।
दो और नियम काम के हैं। बिना नाम के भी जन्म दर्ज हो सकता है: नाम पंजीकरण के 12 महीने के भीतर मुफ़्त जोड़ा जाता है, और उसके बाद 15 साल तक शुल्क देकर। और प्रमाण पत्र में ग़लती हो, तो धारा 15 और राज्य के नियमों के तहत सुधार होता है। रजिस्ट्रार के किसी फ़ैसले से असहमत हों, तो 30 दिन के भीतर ज़िला रजिस्ट्रार के पास अपील की जा सकती है।
यह कागज़ अब पहले से ज़्यादा ज़रूरी क्यों है
2023 के संशोधन के बाद 1 अक्टूबर 2023 या उसके बाद जन्मे लोगों के लिए जन्मतिथि और जन्मस्थान साबित करने में जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य है: स्कूल में दाख़िला, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता सूची, विवाह पंजीकरण, सरकारी नौकरी, पासपोर्ट और आधार, सबके लिए। बच्चे का आधार बनवाने की बात बाल आधार वाले पेज पर है, और नवजात के बाकी कागज़ नवजात के कागज़ों वाले पेज पर।
आगे के लिए
हाथ से: प्रमाण पत्र मिलते ही उसकी साफ़ फ़ोटो लीजिए और पंजीकरण संख्या कहीं अलग से लिख लीजिए; अगली बार कॉपी निकलवाने में यह काम आती है। परिवार के ज़रूरी कागज़ों को एक जगह रखने का तरीका डिजिटल इमरजेंसी बाइंडर में है।
Paperlock में जन्म प्रमाण पत्र की फ़ोटो रखेंगे, तो ऐप नाम, तारीख और पंजीकरण संख्या पढ़कर उसे फ़ाइल कर देता है। सालों बाद पासपोर्ट के फ़ॉर्म पर “बेटे के जन्म प्रमाण पत्र की पंजीकरण संख्या?” पूछिए, प्रमाण पत्र सामने होगा।
यह पेज अक्टूबर 2026 में ORGI, भारत के राजपत्र और गोवा सरकार की प्रकाशित जानकारी पर आधारित है। अपने राज्य के शुल्क और प्रक्रिया स्थानीय रजिस्ट्रार से पक्की करें।