सीधा जवाब: AY 2026-27 यानी अप्रैल 2025 से मार्च 2026 की आय का ITR ज़्यादातर व्यक्तियों को 31 जुलाई 2026 तक भरना था; जिनकी आय बिना ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से है (जैसे ITR-4 भरने वाले), उनके लिए तारीख 31 अगस्त 2026 थी। ये तारीखें निकल चुकी हैं, पर रास्ता बंद नहीं हुआ: 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न भरा जा सकता है, धारा 234F की लेट फीस के साथ, जो कुल आय ₹5 लाख तक हो तो ₹1,000 और उससे ज़्यादा हो तो ₹5,000 है।
“2026-27” लिखा देखकर बहुत लोग उलझते हैं, क्योंकि इसी साल से नया आयकर क़ानून भी लागू हुआ है। पहले यह साफ़ कर लेते हैं।
- 31 जुलाई 2026ITR की सामान्य अंतिम तिथि (ITR-1, ITR-2 वाले ज़्यादातर लोग)
- 31 अगस्त 2026बिना ऑडिट वाले कारोबार या पेशे की आय (जैसे ITR-4)
- 31 दिसंबर 2026बिलेटेड रिटर्न की आख़िरी तारीख, लेट फीस के साथ
- 31 मार्च 2027रिवाइज़्ड रिटर्न की आख़िरी तारीख; 31 दिसंबर के बाद अलग फ़ीस
- इसके बादसिर्फ़ अपडेटेड रिटर्न (ITR-U), अतिरिक्त टैक्स के साथ
स्रोत: आयकर विभाग, Income Tax Returns FAQ (Income Tax Act 2025) और ITR-1, ITR-4 FAQ, अक्टूबर 2026। ऑडिट वाले मामलों की तारीखें अलग हैं।
AY 2026-27 और Tax Year 2026-27 एक नहीं हैं
आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू है, और उसमें “Assessment Year” की जगह “Tax Year” है। आयकर विभाग के FAQ के अनुसार ये दो बिल्कुल अलग ज़िम्मेदारियाँ हैं:
| किस आय का | कब तक | |
|---|---|---|
| AY 2026-27 (1961 का क़ानून) | अप्रैल 2025 से मार्च 2026 | 31 जुलाई 2026; बिना ऑडिट वाले कारोबार के लिए 31 अगस्त 2026 |
| Tax Year 2026-27 (2025 का क़ानून) | अप्रैल 2026 से मार्च 2027 | जुलाई 2027 से पहले देय नहीं |
यानी इस साल आपको दो रिटर्न नहीं भरने हैं। जो रिटर्न अभी बाकी है, वह AY 2026-27 का है, पुराने ITR फ़ॉर्म में, पोर्टल पर AY 2026-27 चुनकर। उसका रिवाइज़्ड या अपडेटेड रिटर्न भी पुराने क़ानून के तहत ही होगा।
तारीख निकल गई: बिलेटेड रिटर्न
- ₹1,000लेट फीस, कुल आय ₹5 लाख तकधारा 234F
- ₹5,000लेट फीस, कुल आय ₹5 लाख से ज़्यादा
- ब्याजबकाया टैक्स पर अलग से
- नुक़सानघाटा आगे नहीं ले जा सकते, कुछ कटौतियाँ और छूटें नहीं मिलतीं
स्रोत: आयकर विभाग, Income Tax Returns FAQ और ITR-1 FAQ, अक्टूबर 2026।
पुराने अधिनियम की धारा 139(4) के तहत AY 2026-27 का बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक, या आकलन पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो, भरा जा सकता है। तरीका वही है जो सामान्य रिटर्न का: ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन, सही फ़ॉर्म, AY 2026-27। फ़र्क़ बस लेट फीस और ब्याज का है।
अगर आपका पैन आधार से लिंक नहीं है, तो उसे पहले ठीक कर लीजिए, वरना रिफ़ंड नहीं आएगा; तरीका आधार-पैन लिंक वाले पेज पर है।
देर की क़ीमत: लेट फीस, ब्याज और नुक़सान
लेट फीस धारा 234F में तय है: ₹5 लाख तक की कुल आय पर ₹1,000, उससे ज़्यादा पर ₹5,000। बकाया टैक्स हो, तो उस पर ब्याज अलग से लगता है।
पैसों के अलावा देर का एक कम दिखने वाला नुक़सान भी है। आयकर विभाग के अनुसार समय पर रिटर्न न भरने पर घाटा आगे नहीं ले जाया जा सकता, और कुछ कटौतियाँ और छूटें नहीं मिलतीं। शेयर या कारोबार में घाटा हुआ हो, तो यह लेट फीस से कहीं महँगा पड़ सकता है।
ग़लती हो गई? रिवाइज़्ड और अपडेटेड रिटर्न
आयकर विभाग की ITR-1 FAQ वाली सूची। ये कागज़ रिटर्न के साथ नहीं लगते, पर पूछताछ या आकलन के लिए सँभालकर रखने होते हैं।
रिटर्न भरने के बाद कोई ग़लती दिखे, तो रिवाइज़्ड रिटर्न भरा जा सकता है। AY 2026-27 से इसकी समय-सीमा बढ़कर असेसमेंट ईयर का अंत, यानी 31 मार्च 2027 हो गई है, या आकलन पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो। 31 दिसंबर के बाद रिवाइज़ करने पर धारा 234I के तहत अलग फ़ीस है: ₹5 लाख तक की आय पर ₹1,000, उससे ज़्यादा पर ₹5,000।
इन सबके बाद भी अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) का रास्ता है, जो अतिरिक्त टैक्स के साथ भरा जाता है और जिससे टैक्स देनदारी घटाई या रिफ़ंड बढ़ाया नहीं जा सकता। आयकर विभाग के FAQ के अनुसार छूटे हुए पिछले चार साल तक के रिटर्न ITR-U से भरे जा सकते हैं।
कौन-सा कागज़ चाहिए
ITR फ़ॉर्म में कोई दस्तावेज़ संलग्न नहीं होता, पर भरने के लिए जानकारी इन्हीं कागज़ों से आती है, और पूछताछ या आकलन में यही माँगे जाते हैं। आयकर विभाग की सलाह है कि भरने से पहले AIS और Form 26AS डाउनलोड करके TDS और जमा टैक्स का मिलान कर लें; कोई अंतर दिखे तो नौकरी देने वाले, बैंक या कटौती करने वाले से सुधरवाएँ।
ये कागज़ कितने साल रखने चाहिए, इसका सामान्य हिसाब कौन-से कागज़ कितने साल रखें वाली गाइड में है। नई नौकरी शुरू की है, तो Form 16 और PF से जुड़ी बातें नई नौकरी वाले पेज पर हैं।
भरने के बाद: ई-वेरिफ़ाई करना न भूलें
रिटर्न जमा करना आधा काम है। उसे ई-वेरिफ़ाई करना होता है, या फिर हस्ताक्षर की हुई ITR-V स्पीड पोस्ट से आयकर विभाग के केंद्रीकृत प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) को 30 दिन के भीतर भेजनी होती है।
अगले साल के लिए
हाथ से: AIS, Form 16 और रिटर्न की पावती हर साल एक ही फ़ोल्डर में रखिए, और कैलेंडर में जून के आख़िर की एक एंट्री डाल दीजिए, ताकि जुलाई की भीड़ से पहले कागज़ जुट जाएँ। अगले साल यह Tax Year 2026-27 का पहला रिटर्न होगा, नए फ़ॉर्म में।
Paperlock में Form 16, किराये की रसीदें और निवेश के प्रमाणपत्र रखेंगे, तो ऐप हर कागज़ की राशि और तारीख पढ़कर उसे फ़ाइल कर देता है। अगले जुलाई में “पिछले साल LIC का कितना प्रीमियम भरा?” पूछिए, जवाब रसीद के साथ आएगा।
यह पेज अक्टूबर 2026 में incometax.gov.in पर दर्ज जानकारी पर आधारित है। तारीखों से जुड़ी कोई भी नई घोषणा ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर ही देखें। यह कर सलाह नहीं है।