सीधा जवाब: IRDAI के 29 मई 2024 के मास्टर सर्कुलर में हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम की देय तारीख के बाद 30 दिन का ग्रेस पीरियड है (तिमाही, छमाही या सालाना प्रीमियम पर) और 15 दिन का (मासिक किस्त पर)। इस दौरान रिन्यू करने पर पॉलिसी के सभी जमा क्रेडिट, यानी sum insured, No Claim Bonus, वेटिंग पीरियड और मोराटोरियम अवधि, सुरक्षित रहते हैं। ग्रेस के बाद रिन्यू न हुआ तो पॉलिसी लैप्स मानिए।
- प्रीमियम की तारीखपॉलिसी के रिन्यू होने का दिन
- तारीख से 15 दिन तकमासिक किस्त वालों का ग्रेस पीरियड
- तारीख से 30 दिन तकतिमाही, छमाही या सालाना प्रीमियम वालों का ग्रेस पीरियड
- ग्रेस के बादरिन्यू न हुआ तो पॉलिसी लैप्स; वेटिंग पीरियड जैसे क्रेडिट खोने का जोखिम
स्रोत: IRDAI, Master Circular on Health Insurance Business (29.05.2024)। आपकी पॉलिसी के शब्द अलग हो सकते हैं।
ग्रेस पीरियड असल में क्या है
- बचता हैSum insured, No Claim Bonus, निर्दिष्ट वेटिंग पीरियडग्रेस के भीतर रिन्यू करने पर
- 30 / 15 दिनसालाना-तिमाही-छमाही / मासिकप्रीमियम की तारीख से
- 60 महीनेलगातार कवरेज के बाद पॉलिसी चुनौती-मुक्तधोखाधड़ी को छोड़कर (मोराटोरियम)
स्रोत: IRDAI Master Circular, मई 2024।
IRDAI के FAQ में परिभाषा है: प्रीमियम की देय तारीख के ठीक बाद का तय समय, जिसमें भुगतान करके पॉलिसी चालू रखी या रिन्यू की जा सकती है, वेटिंग पीरियड और pre-existing बीमारियों के कवर जैसे लगातार चलने वाले लाभ खोए बिना। उसी परिभाषा में यह भी है कि जिस अवधि का प्रीमियम नहीं मिला, उसका कवर उपलब्ध नहीं होता।
इसलिए ग्रेस पीरियड “बिना नतीजे की छूट” नहीं है। वह सिर्फ़ इतनी सुविधा है कि रिन्यू देर से करें तो भी लाभ बचें। सर्कुलर में अलग से लिखा है कि अगर प्रीमियम पॉलिसी अवधि में किस्तों में दिया जा रहा हो, तो ग्रेस के दौरान भी कवरेज उपलब्ध रहेगा। सालाना प्रीमियम के मामले में सर्कुलर इस बारे में कुछ अलग से नहीं कहता, इसलिए ग्रेस के दिनों में कवर के बारे में अपनी कंपनी से लिखित में पूछ लेना ठीक रहता है।
पॉलिसीहोल्डर पोर्टल (IRDAI) की सलाह इस मामले में सख़्त है: रिन्यू समय पर करें, देर होने पर बीमा की घटना का कवर न मिल सकता है और continuity के लाभ जा सकते हैं; और रिन्यूअल में एक दिन का भी अंतर न आने दें।
ग्रेस के बाद लैप्स: क्या दाँव पर
सर्कुलर के अनुसार क्रेडिट तभी सुरक्षित हैं जब पॉलिसी ग्रेस के भीतर रिन्यू हो। उसके बाद रिन्यू का मतलब पॉलिसी का नए सिरे से चलना हो सकता है, जिसमें:
- वेटिंग पीरियड फिर से (बीमारी विशेष और pre-existing वाले) गिने जा सकते हैं;
- No Claim Bonus जा सकता है;
- मोराटोरियम की गिनती टूट सकती है: सर्कुलर के अनुसार लगातार 60 महीने के कवरेज के बाद धोखाधड़ी को छोड़कर पॉलिसी या क्लेम को गैर-प्रकटीकरण पर चुनौती नहीं दी जा सकती।
यह “हो सकता है” इसलिए है कि ग्रेस के बाद की स्थिति हर कंपनी और पॉलिसी के शब्दों में अलग हो सकती है। बीमा कंपनी से लिखित में पूछिए कि लैप्स के बाद नई पॉलिसी में पुराने क्रेडिट मिलेंगे या नहीं।
तारीख निकल गई हो तो क्रम से यह करें
- पॉलिसी शेड्यूल खोलकर प्रीमियम की देय तारीख और भुगतान का तरीका (सालाना या किस्तों में) देखिए; ग्रेस के दिन इसी से गिने जाते हैं।
- पॉलिसी के शब्द-पत्र में “Grace Period” खोजिए। पॉलिसीहोल्डर पोर्टल पर मानक उत्पाद Arogya Sanjeevani के FAQ में भी सालाना भुगतान पर 30 दिन और बाकी तरीकों पर 15 दिन का ग्रेस है, यानी सर्कुलर जैसा ही; आपकी पॉलिसी में यही हो, यह मानकर मत चलिए।
- ग्रेस के भीतर भुगतान कर दीजिए और रसीद सँभालकर रखिए। सफल भुगतान का सबूत वही है जिससे आप बाद में कह सकेंगे कि रिन्यू ग्रेस में हुआ।
- अगर भुगतान ग्रेस के बाहर जा चुका है, तो कंपनी से लिखित में पूछिए कि क्रेडिट कैसे गिने जाएँगे; मौखिक जवाब पर भरोसा मत कीजिए।
कंपनी बदलनी हो तो
पॉलिसीहोल्डर पोर्टल के अनुसार पोर्टेबिलिटी सिर्फ़ रिन्यूअल के समय हो सकती है; वेटिंग पीरियड का क्रेडिट मिलता है, पर बाकी शर्तें और प्रीमियम नई कंपनी के विवेक पर हैं। यानी देर से किया गया रिन्यू पोर्टिंग का मौक़ा भी बिगाड़ सकता है।
तारीखें सँभालने का तरीका
हाथ से: पॉलिसी शेड्यूल की फ़ोटो लें, प्रीमियम की देय तारीख और ग्रेस पीरियड कैलेंडर में डालिए, 30 दिन पहले एक याद लगाइए। कार बीमा की तारीख का हिसाब अलग है; उसके लिए गाड़ी का बीमा रिन्यू देखें।
Paperlock में पॉलिसी का पन्ना रखने पर ऐप उसकी तारीखें पढ़ लेता है और रिमाइंडर चालू होने पर समाप्ति से 30 दिन और 7 दिन पहले याद दिलाता है। बीमा के बाकी कागज़ कैसे रखें, यह बीमा दस्तावेज़ फ़ोन में रखना में है। सरकारी योजना वाला कार्ड अलग चीज़ है: आयुष्मान कार्ड वाला पेज देखिए।
यह पेज अक्टूबर 2026 में IRDAI और पॉलिसीहोल्डर पोर्टल के पेजों पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। अपनी पॉलिसी के लिए बीमा कंपनी या IRDAI की शिकायत सेवा से पुष्टि करें।